Sunday, 14 July 2019

Hindustan Ki Baat - Episode 1 : जानिए दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रवादी संगठन RSS का पूरा इतिहास

आज हिंदुस्तान की बात के इस एपिसोड में जानेंगे दुनिया के सबसे बड़े सस्वयंसेवी संगठन और एक एक प्रखर राष्ट्रवादी संगगठन आरएसएस के बारे में !



'नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे , त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्। ' 

जी हाँ इसी प्रार्थना के साथ पिछले कई दशकों से लगातार देश के कोने कोने में संघ की शाखायें लग रही हैं. और इस श्लोक का अर्थ है - हे मेरी प्यारी  मातृभूमि! मैं तुझे सदा  नमन करता हूँ क्योकि तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है तूं  मेरी जननी है !

दुनिया के इस सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने की थी. भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ संघ के प्रथम सरसंघचालक  हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई, और 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अपेक्षा संघ या आर.एस.एस. के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। संघ का नामकरण 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' 17 अप्रैल 1926 को हुआ. इसी दिन हेडगेवार को सर्वसम्मति से संघ प्रमुख चुना गया, लेकिन सरसंघचालक वे नवंबर 1929 में बनाए गए.

नागपुर के अखाड़ों से तैयार हुआ यह संगठन  मौजूदा समय में विराट रूप ले चुका है.प्रारम्भ में इसका कार्य   हिंदू अनुशासन के माध्यम से चरित्र प्रशिक्षण प्रदान करना था और हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए हिंदू समुदाय को एकजुट करना था। 

संघ भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को "मजबूत" करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है। 
धीरे-धीरे, आरएसएस एक प्रमुख हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में  उभरा और अब तो कई संगठनों को जन्म दे चूका है जो आज भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को संजोये हुए हैं ! जिसमे भारतीय जनता पार्टी एक प्रमुख नाम है जो आरएसएस का राजनैतिक संगठन मन जाता है 

संघ हमेशा से ही एक प्रखर राष्ट्रवादी संगठन रहा है  इसका सबसे बड़ा उदाहरद हमें चीन युद्ध में देखने को मिला जब 1962 में चीन के धोखे से किए हमले से देश सन्न रह गया था. 

उस वक्त आरएसएस ने सरहदी इलाकों में हर खतरे का सामना करते हुए मदत पहुंचे थी . इससे प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नेहरू ने 1963 में गणतंत्र दिवस की परेड में संघ को बुलाया था. 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान संघ का काम सराहनीय था।

संघ ने अपने लंबे सफर में कई उपलब्धियां अर्जित कीं जबकि तीन बार उसपर प्रतिबंध भी लगा.
पहली बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या को संघ से जोड़कर देखा गया और उसपर प्रतिबन्ध लगाकर संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर को बंदी बनाया गया. लेकिन 18 महीने के बाद संघ से प्रतिबंध हटा दिया गया. 
दूसरी बार आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी ने दो साल के लिए संघ पर पाबंदी लगा दी . 
तीसरी बार 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंश के लिए संघ पर छह महीने के लिए के प्रतिबन्ध लगा दिया गया 

आरएसएस साफ तौर पर हिंदू समाज को उसके धर्म और संस्कृति के आधार पर शक्तिशाली बनाने की बात करता है. संघ से निकले स्वयंसेवकों ने ही बीजेपी को स्थापित किया. हर साल विजयादशमी के दिन संघ स्थापना के साथ ही शस्त्र पूजन की परम्परा निभाई जाती है. देश भर में पथ संचलन निकलते हैं. कभी 25 स्वयंसेवकों से शुरू हुआ संघ आज विशाल संगठन के रूप में स्थापित है.


No comments:

Post a Comment

Popular Posts